रेलवे 19 साल में 19 किलोमीटर भी नहीं बिछा पाया पटरी – Hindustan हिंदी

19 साल बाद भी खगड़िया-कुशेश्वर स्थान रेलखंड पर ट्रेन नहीं दौड़ पाई है। इस रेलखंड पर सफर करना यहां के लागों के लिए अब भी सपना ही बना हुआ है। जबकि इस चिरप्रतीक्षित रेल परियोजना को दस साल पहले ही पूरा हो जाना था। हालांकि अब लक्ष्य वर्ष 2020 तक का मिला है। लेकिन यह भी तय समय पर पूरा होगा या नहीं कुछ कहा नहीं जा सकता।


वर्ष 1998 में तत्कालीन रेलमंत्री रामविलास पासवान ने 162 करोड़ की लागत से इस परियोजना की स्वीकृति दी थी। लेकिन अब इसकी लागत बढ़कर 565 करोड़ हो गई है। श्री पासवान के गृह जिला खगड़िया के शहरबन्नी गांव से होकर गुजरने वाली इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का काम 19 साल में महज 18 किलोमीटर तक ही हो पाई है। इन 18 किलोमीटर में 13 किलोमीटर में ही रेलवे ट्रैक बिछाया जा सका है। 44 किलोमीटर लम्बी रेल परियोजना को पर्याप्त आवंटन नहीं मिलने से काम धीमी गति से चल रही है।


पिछले साल साल इस रेल परियोजना को महज 37 करोड़ का ही आवंटन मिला था। इन चार साल में सौ करोड़ का आवंटन जरुर मिला है लेकिन इस रेल परियोजना के लिए ये नाकाफी है। जाहिर है परियोजना की अब लागत भी बढ़कर 565 करोड़ हो गई है। लागत में इस साल 25 करोड़ का इजाफा हुआ है। वर्तमान में खगड़िया से कामास्थान तक 13 किलोमीटर ही रेल लाइन बिछाया जा सका है। कामास्थान से अलौली गढ़ तक मिट्टी भरने का काम ही हो रहा है।


कहीं-कहीं पुल का काम हो रहा है। वही शहरबन्नी के पास रेल परियोजना के लिए अधिग्रहीत की गई जमीन का मुआवजा कई भूस्वामियों को नहीं मिल पाया है। इससे यहां काम अटका है। जैसे-जैसे परियोजना का समय बढ़ रहा है उसी तरह लागत भी बढ़ती जा रही है। 2012 में ही पूरा होना था अलौलीगढ़ तक काम: खगड़िया से अलौलीगढ़ तक रेल परियोजना का काम 2012 तक ही पूरा होना जाना था। लेकिन नहीं हुआ। रेल परियोजना की स्वीकृति के बाद काम शुरू होने में ही दस साल का समय लग गया। एक तो काम ही विलंब से शुरू हुआ वही दूसरी ओर पर्याप्त आवंटन नहीं मिलने से परियोजना पूरा होने में दिक्कत आ रही है।


परियोजना को दस साल पहले 2007 में ही पूरा करने का उस समय लक्ष्य रखा गया था। वर्तमान में 2020 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। काम जब शुरू हुआ तो आवंटन के अभाव के चलते गति नहीं मिला। उल्लेखनीय है कि खगड़िया-कुशेश्वर स्थान रेल परियोजना का सर्वे वर्ष 2002 में किया गया। वर्ष 2007-08 से परियोजना का काम शुरू हुआ। रेलवे द्वारा काम शुरू करने के लिए महज एक करोड़ रुपए का ही आवंटन दिया गया था।

Source Article from http://www.livehindustan.com/bihar/khagaria/story-railway-can-not-cover-19-km-in-19-years-1589212.html

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