एईएस के लिए लीची दोषी नहीं, कीटनाशक से सेहत पर असर – Hindustan हिंदी

एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) के लिए लीची नाहक में ही बदनाम हो रही है। नई रिपोर्ट के अनुसार लीची ठीक है। हालांकि इस पर होने वाले पेस्टिसाइडस व इन्सेक्टसाइडस के छिड़काव से सेहत पर असर पड़ता है।

यह खुलासा तब हुआ जब पंजाब के जालंधर निवासी केएस नागरा ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत की। इसमें जुलाई 2017 में जारी एक रिपोर्ट के आधार पर मुजफ्फरपुर इंसेफेलाइटिस व लीची पर पेस्टिसाइडस के छिड़काव का हवाला दिया है। साथ ही 2014 में एसकेएमसीएच व जूरनछपरा स्थित केजरीवाल अस्पताल में 122 बच्चों की मौत का जिक्र किया है। इस साल 399 बच्चे एईएस ज्ञात व अज्ञात बीमारी से पीड़ित हुए थे। मानवाधिकार आयोग ने इसको लेकर जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट तलब की है। कहा है कि यदि मानव के खाने योग्य कोई केमिकल नहीं है तो इस फल पर इसका प्रयोग कैसे हो रहा है।

दरअसल द अमेरिकन जर्नल ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन व द लैसेंट में इस पर शोघ जारी हुआ है। शोधकर्ताओं ने 2014 में मुजफ्फरपुर में पीड़ित बच्चों के साथ लीची बगान व फलों का अध्ययन किया। 50 से अधिक बच्चों का अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि एग्रो में प्रयोग होने वाले पेस्टिसाइडस इंडोसल्फान ग्रुप का लीची पर छिड़काव किया जा रहा है। यह किसी फल के लिए नहीं है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जैसे ही लीची फल पर किसी तरह पानी मसलन बारिश या अन्य किसी स्रोत से डाला जाता है, केमिकल प्रभाव कम हो जाता है। केमिकल का साइड इफेक्ट सबसे पहले बच्चों के दांत के नीचे मसूड़ों पर दिखता है। मसूड़ों के टिश्यू साथ ब्लड सैंपल ले गए थे। इनके शोध को इन जर्नल में स्वीकार किया गया। सीएस डॉ. ललिता सिंह ने बताया कि मानवाधिकार आयोग को रिपोर्ट भेजी गयी है।

Source Article from http://www.livehindustan.com/bihar/muzaffarpur/story-lichi-is-not-guilty-for-aes-pesticide-impact-on-health-1622153.html

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